Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.19.13: रघुनन्दन! अग्निदेव को संतुष्ट करके भगवान इन्द्रजित ने ऐसी शक्ति प्राप्त कर ली है कि वे युद्ध में अदृश्य होकर विशाल व्यूह बनाकर शत्रुओं पर आक्रमण करते हैं॥13॥   |   ramayan सर्ग 6.19: विभीषण का आकाश से उतरकर भगवान् श्रीराम के चरणों की शरण लेना, श्रीराम का रावण-वध की प्रतिज्ञा करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 19: विभीषण का आकाश से उतरकर भगवान् श्रीराम के चरणों की शरण लेना, श्रीराम का रावण-वध की प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.19.13 
संग्रामे सुमहद‍्व्यूहे तर्पयित्वा हुताशनम्।
अन्तर्धानगत: श्रीमानिन्द्रजिद्धन्ति राघव॥ १३॥
 
 
अनुवाद
रघुनन्दन! अग्निदेव को संतुष्ट करके भगवान इन्द्रजित ने ऐसी शक्ति प्राप्त कर ली है कि वे युद्ध में अदृश्य होकर विशाल व्यूह बनाकर शत्रुओं पर आक्रमण करते हैं॥13॥
 
Ragunandan! By satisfying Agnidev, Lord Indrajit has attained such power that he becomes invisible in the battle with a huge array and attacks the enemies. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)