श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.18.8 
अनधीत्य च शास्त्राणि वृद्धाननुपसेव्य च।
न शक्यमीदृशं वक्तुं यदुवाच हरीश्वर:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रानंदन! इस समय वानरराज ने जो कहा है, वह शास्त्रों का अध्ययन किए बिना और बड़ों की सेवा किए बिना कोई नहीं कह सकता।
 
Sumitra Nandan! What the monkey king has said at this time cannot be said by anyone without studying the scriptures and serving the elders.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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