Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.18.5-6h: प्रभु! वह दुष्ट हो या न हो, इससे क्या फर्क पड़ता है? वह तो रात्रिचर है। फिर यदि कोई मनुष्य ऐसे संकट में अपने भाई को छोड़ सकता है, तो अपने कुटुम्बियों में से और किसका परित्याग न कर सकेगा?॥5 1/2॥ | ramayan सर्ग 6.18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स दुष्टो वाप्यदुष्टो वा किमेष रजनीचर:।
ईदृशं व्यसनं प्राप्तं भ्रातरं य: परित्यजेत्॥ ५॥
को नाम स भवेत् तस्य यमेष न परित्यजेत्।
अनुवाद
प्रभु! वह दुष्ट हो या न हो, इससे क्या फर्क पड़ता है? वह तो रात्रिचर है। फिर यदि कोई मनुष्य ऐसे संकट में अपने भाई को छोड़ सकता है, तो अपने कुटुम्बियों में से और किसका परित्याग न कर सकेगा?॥5 1/2॥
‘Prabhu! Whether he is evil or not, what does it matter? He is a night creature. Then if a man can leave his brother in such a crisis, then who else of his relatives will he not be able to abandon?'॥ 5 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥