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ramayan 6.18.4: भगवान राम के मुख से यह बात सुनकर वानरराज सुग्रीव ने स्वयं उसे दोहराया और उस पर विचार करके यह परम सुन्दर बात कही-॥4॥   |   ramayan सर्ग 6.18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.18.4 
सुग्रीवस्त्वथ तद्वाक्यमाभाष्य च विमृश्य च।
तत: शुभतरं वाक्यमुवाच हरिपुङ्गव:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भगवान राम के मुख से यह बात सुनकर वानरराज सुग्रीव ने स्वयं उसे दोहराया और उस पर विचार करके यह परम सुन्दर बात कही-॥4॥
 
Hearing this statement from Lord Rama, the monkey king Sugreeva himself repeated it and after pondering over it said this most beautiful thing -॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)