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ramayan 6.18.38: अतः हे रघुनन्दन! विभीषण शीघ्र ही हमारी तरह यहाँ निवास करें और हमारे मित्र बन जाएँ॥ 38॥   |   ramayan सर्ग 6.18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.18.38 
तस्मात् क्षिप्रं सहास्माभिस्तुल्यो भवतु राघव।
विभीषणो महाप्राज्ञ: सखित्वं चाभ्युपैतु न:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
अतः हे रघुनन्दन! विभीषण शीघ्र ही हमारी तरह यहाँ निवास करें और हमारे मित्र बन जाएँ॥ 38॥
 
Therefore, O son of Raghunandan! Vibhishan should soon live here like us and become our friend.'॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)