श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  6.18.35 
रामस्य तु वच: श्रुत्वा सुग्रीव: प्लवगेश्वर:।
प्रत्यभाषत काकुत्स्थं सौहार्देनाभिपूरित:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
भगवान् रामजी के ये वचन सुनकर वानरराज सुग्रीव ने सौहार्दपूर्वक उनसे कहा-॥35॥
 
Hearing these words of Lord Rama, the monkey king Sugreeva filled with cordiality said to him -॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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