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ramayan 6.18.24: कहते हैं कि एक कबूतर ने अपने ही शत्रु शिकारी का यथोचित आतिथ्य सत्कार किया और उसे आमंत्रित करके अपने शरीर का मांस खिला दिया॥ 24॥   |   ramayan सर्ग 6.18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.18.24 
श्रूयते हि कपोतेन शत्रु: शरणमागत:।
अर्चितश्च यथान्यायं स्वैश्च मांसैर्निमन्त्रित:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
कहते हैं कि एक कबूतर ने अपने ही शत्रु शिकारी का यथोचित आतिथ्य सत्कार किया और उसे आमंत्रित करके अपने शरीर का मांस खिला दिया॥ 24॥
 
It is said that a pigeon had welcomed his own enemy, a hunter, with due hospitality and had invited him and fed him with the flesh from his own body.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)