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ramayan 6.18.23: हे वानरयुथपति! यदि मैं चाहूँ तो पृथ्वी पर स्थित समस्त भूत, दानव, यक्ष और राक्षसों को एक ही अंगुली से मार सकता हूँ॥ 23॥   |   ramayan सर्ग 6.18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.18.23 
पिशाचान् दानवान् यक्षान् पृथिव्यां चैव राक्षसान्।
अङ्गुल्यग्रेण तान् हन्यामिच्छन् हरिगणेश्वर॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे वानरयुथपति! यदि मैं चाहूँ तो पृथ्वी पर स्थित समस्त भूत, दानव, यक्ष और राक्षसों को एक ही अंगुली से मार सकता हूँ॥ 23॥
 
O Vanarayuthapati! If I wish, I can kill all the ghosts, demons, yakshas and rakshasas on the earth with just one finger.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)