Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.18.17: हे धर्मात्माओं में श्रेष्ठ रघुनन्दन! आप उस राक्षस को रावण का भेजा हुआ समझें। मैं उसे कैद करना उचित समझता हूँ॥ 17॥   |   ramayan सर्ग 6.18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.18.17 
रावणेन प्रणिहितं तमवेहि निशाचरम्।
तस्याहं निग्रहं मन्ये क्षमं क्षमवतां वर॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे धर्मात्माओं में श्रेष्ठ रघुनन्दन! आप उस राक्षस को रावण का भेजा हुआ समझें। मैं उसे कैद करना उचित समझता हूँ॥ 17॥
 
O Raghunandan, the best among those who do the right thing! You should consider that demon to be sent by Ravana. I think it is right to imprison him.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)