Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.18.15: हे पिता सुग्रीव! इस संसार में सभी भाई भरत के समान नहीं हैं। पिता के सभी पुत्र मेरे समान नहीं हैं और सभी मित्र आपके समान नहीं हैं।॥15॥   |   ramayan सर्ग 6.18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.18.15 
न सर्वे भ्रातरस्तात भवन्ति भरतोपमा:।
मद्विधा वा पितु: पुत्रा: सुहृदो वा भवद्विधा:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
हे पिता सुग्रीव! इस संसार में सभी भाई भरत के समान नहीं हैं। पिता के सभी पुत्र मेरे समान नहीं हैं और सभी मित्र आपके समान नहीं हैं।॥15॥
 
‘Father Sugreeva! Not all brothers in this world are like Bharat. Not all sons of a father are like me and not all friends are like you.’॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)