Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.18.13: हम लोग उसके सगे नहीं हैं (अतः उसे हमसे किसी स्वार्थ की हानि का भय नहीं है) और यह राक्षस राजा बनना चाहता है (अतः वह हमें त्याग नहीं सकता) इनमें से बहुत से राक्षस बड़े विद्वान भी हैं (अतः यदि वे मित्र बन जाएँ तो बहुत उपयोगी सिद्ध होंगे) अतः विभीषण को अपने पक्ष में कर लेना चाहिए॥13॥ | ramayan सर्ग 6.18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न वयं तत्कुलीनाश्च राज्यकाङ्क्षी च राक्षस:।
पण्डिता हि भविष्यन्ति तस्माद् ग्राह्यो विभीषण:॥ १३॥
अनुवाद
हम लोग उसके सगे नहीं हैं (अतः उसे हमसे किसी स्वार्थ की हानि का भय नहीं है) और यह राक्षस राजा बनना चाहता है (अतः वह हमें त्याग नहीं सकता) इनमें से बहुत से राक्षस बड़े विद्वान भी हैं (अतः यदि वे मित्र बन जाएँ तो बहुत उपयोगी सिद्ध होंगे) अतः विभीषण को अपने पक्ष में कर लेना चाहिए॥13॥
‘We are not his relatives (so he does not fear any selfish harm from us) and this demon desires to become the king (so he cannot abandon us). Many of these demons are also very learned (so they will prove to be very useful if they become friends) therefore Vibhishan should be won over to our side.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥