श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.18.12 
यस्तु दोषस्त्वया प्रोक्तो ह्यादानेऽरिबलस्य च।
तत्र ते कीर्तयिष्यामि यथाशास्त्रमिदं शृणु॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तुमने शत्रु सैनिक को अपनाने में यह दोष बताया है कि वह अवसर पाकर आक्रमण कर देता है। इस विषय में मैं तुम्हें नीति के अनुसार उत्तर देता हूँ। सुनो॥12॥
 
You have pointed out the fault in adopting an enemy soldier, that he attacks when he finds an opportunity. Regarding this, I am giving you an answer in accordance with ethics. Listen. ॥ 12॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd