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ramayan 6.18.11: एक ही कुल में उत्पन्न हुए जो भाई अपने हृदय में पाप नहीं रखते, वे अपने सम्बन्धियों को हितैषी मानते हैं, परंतु उसी कुल का यही भाई सज्जन होते हुए भी राजाओं के प्रति प्रायः शंकालु रहता है (यहाँ तक कि रावण भी विभीषण को संदेह की दृष्टि से देखने लगा है; अतः उसका यहाँ उसकी रक्षा के लिए आना अनुचित नहीं है। अतः तुम्हें अपने भाई को त्यागने के लिए उस पर दोष नहीं लगाना चाहिए)॥11॥   |   ramayan सर्ग 6.18: भगवान् श्रीराम का शरणागत की रक्षा का महत्त्व एवं अपना व्रत बताकरविभीषण से मिलना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.18.11 
अपापास्तत्कुलीनाश्च मानयन्ति स्वकान् हितान्।
एष प्रायो नरेन्द्राणां शङ्कनीयस्तु शोभन:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
एक ही कुल में उत्पन्न हुए जो भाई अपने हृदय में पाप नहीं रखते, वे अपने सम्बन्धियों को हितैषी मानते हैं, परंतु उसी कुल का यही भाई सज्जन होते हुए भी राजाओं के प्रति प्रायः शंकालु रहता है (यहाँ तक कि रावण भी विभीषण को संदेह की दृष्टि से देखने लगा है; अतः उसका यहाँ उसकी रक्षा के लिए आना अनुचित नहीं है। अतः तुम्हें अपने भाई को त्यागने के लिए उस पर दोष नहीं लगाना चाहिए)॥11॥
 
Brothers born in the same clan who have no sin in their hearts consider their relatives to be well-wishers, but this same brother of the same clan, in spite of being a good person, is often suspicious of kings (even Ravana has started looking at Vibhishan with suspicion; therefore, it is not improper for him to come here for his protection. Therefore, you should not blame him for abandoning his brother).॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)