Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.17.51: प्रभु! आप ज्ञानियों में श्रेष्ठ, बलवान और वक्ताओं में श्रेष्ठ हैं। यदि बृहस्पति भी भाषण दें, तो वे आपसे श्रेष्ठ वक्ता सिद्ध नहीं हो सकेंगे।   |   ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  6.17.51 
न भवन्तं मतिश्रेष्ठं समर्थं वदतां वरम्।
अतिशाययितुं शक्तो बृहस्पतिरपि ब्रुवन्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! आप ज्ञानियों में श्रेष्ठ, बलवान और वक्ताओं में श्रेष्ठ हैं। यदि बृहस्पति भी भाषण दें, तो वे आपसे श्रेष्ठ वक्ता सिद्ध नहीं हो सकेंगे।
 
‘Prabhu! You are the best among the wise, powerful and the best among the speakers. Even if Brihaspati were to give a speech, he would not be able to prove himself a better speaker than you. 51.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)