Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.17.4: वीर विभीषण भी मेघ या पर्वत के समान शोभायमान थे। वे वज्रधारी इन्द्र के समान तेजस्वी, उत्तम आयुधों से सुसज्जित और दिव्य आभूषणों से विभूषित थे। | ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स च मेघाचलप्रख्यो वज्रायुधसमप्रभ:।
वरायुधधरो वीरो दिव्याभरणभूषित:॥ ४॥
अनुवाद
वीर विभीषण भी मेघ या पर्वत के समान शोभायमान थे। वे वज्रधारी इन्द्र के समान तेजस्वी, उत्तम आयुधों से सुसज्जित और दिव्य आभूषणों से विभूषित थे।
The brave Vibhishana also appeared like a cloud or a mountain. He was as radiant as the thunderbolt-wielding Indra, armed with excellent weapons and adorned with divine ornaments.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥