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अज्ञातं नास्ति ते किंचित् त्रिषु लोकेषु राघव।
आत्मानं पूजयन् राम पृच्छस्यस्मान् सुहृत्तया॥ ३५॥
अनुवाद
रघुनन्दन! तीनों लोकों में ऐसी कोई वस्तु नहीं है जो आपसे अनभिज्ञ हो। तथापि हम आपके ही अंग हैं। अतः आप हमें मित्रतापूर्वक सम्मान दें और हमारी सलाह लें।
Raghunandan! There is nothing in the three worlds that is not known to you. However, we are your own limbs. Therefore, you honour us with friendship and ask for our advice.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥