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ramayan 6.17.34: इस प्रकार परामर्श पूछे जाने पर भगवान् रामजी को प्रसन्न करने की इच्छा रखने वाले सभी वानर अपना आलस्य छोड़कर उत्साहित हो गए और आदरपूर्वक अपना-अपना मत कहने लगे-॥34॥   |   ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.17.34 
इत्येवं परिपृष्टास्ते स्वं स्वं मतमतन्द्रिता:।
सोपचारं तदा राममूचु: प्रियचिकीर्षव:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार परामर्श पूछे जाने पर भगवान् रामजी को प्रसन्न करने की इच्छा रखने वाले सभी वानर अपना आलस्य छोड़कर उत्साहित हो गए और आदरपूर्वक अपना-अपना मत कहने लगे-॥34॥
 
Having been asked for advice in this manner, all the monkeys who wished to please Lord Rama, leaving behind their laziness, became excited and began to express their opinions respectfully -॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)