श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.17.28 
राक्षसो जिह्मया बुद्धॺा संदिष्टोऽयमिहागत:।
प्रहर्तुं मायया छन्नो विश्वस्ते त्वयि चानघ॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे भोले श्री राम! मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि यह राक्षस रावण के कहने पर यहाँ आया है। इसका मन छल से भरा हुआ है। यह माया के प्रभाव से छिप जाएगा और जब आप इसमें पूर्ण विश्वास कर लेंगे और निश्चिंत हो जाएँगे, तब यह आप पर आक्रमण करेगा। वह इसी उद्देश्य से यहाँ आया है॥ 28॥
 
Innocent Shri Ram! It seems to me that this demon has come here at the behest of Ravana. His mind is full of deceit. He will hide under the influence of Maya and when you will have complete faith in him and become carefree about him, then he will attack you. He has come here for this very purpose.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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