Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.17.25: प्रभु! वह स्वभाव से ही राक्षस है और शत्रु का भाई होने का दावा भी कर रहा है। इस दृष्टि से तो हमारा शत्रु ही यहाँ आया है; फिर हम उस पर कैसे विश्वास कर सकते हैं?॥ 25॥ | ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रभु! वह स्वभाव से ही राक्षस है और शत्रु का भाई होने का दावा भी कर रहा है। इस दृष्टि से तो हमारा शत्रु ही यहाँ आया है; फिर हम उस पर कैसे विश्वास कर सकते हैं?॥ 25॥
‘Prabhu! He is a demon by nature and is also claiming to be the brother of the enemy. From this point of view, it is our enemy himself who has come here; then how can we trust him?॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥