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ramayan 6.17.20: हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले रघुनन्दन! अतः अपने वानर सैनिकों पर कृपा करने और शत्रुओं को रोकने के लिए कार्यों की योजना, सेना की व्यूह रचना, युक्तियुक्त उपायों का प्रयोग और गुप्तचरों की नियुक्ति आदि में तुम्हें सदैव सावधान रहना चाहिए। ऐसा करने से ही तुम्हारा कल्याण होगा॥ 20॥   |   ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.17.20 
मन्त्रे व्यूहे नये चारे युक्तो भवितुमर्हसि।
वानराणां च भद्रं ते परेषां च परंतप॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले रघुनन्दन! अतः अपने वानर सैनिकों पर कृपा करने और शत्रुओं को रोकने के लिए कार्यों की योजना, सेना की व्यूह रचना, युक्तियुक्त उपायों का प्रयोग और गुप्तचरों की नियुक्ति आदि में तुम्हें सदैव सावधान रहना चाहिए। ऐसा करने से ही तुम्हारा कल्याण होगा॥ 20॥
 
O son of Raghunandan, who torments the enemies! Therefore, you should be always cautious about the planning of the tasks, the mobilisation of the army, the use of sensible methods and the appointment of spies etc. in order to shower favour on your monkey soldiers and to restrain the enemies. Only by doing this will you be benefited.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)