Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.17.16: 'इतना ही नहीं, उसने मुझसे बहुत कठोर बातें कहीं और दास के समान मेरा अपमान किया। इसलिए मैं अपनी स्त्री और बच्चों को वहीं छोड़कर श्री रघुनाथजी की शरण में आया हूँ॥ 16॥   |   ramayan सर्ग 6.17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 17: विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और श्रीराम का अपने मन्त्रियों के साथ उन्हें आश्रय देने के विषय में विचार करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.17.16 
सोऽहं परुषितस्तेन दासवच्चावमानित:।
त्यक्त्वा पुत्रांश्च दारांश्च राघवं शरणं गत:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'इतना ही नहीं, उसने मुझसे बहुत कठोर बातें कहीं और दास के समान मेरा अपमान किया। इसलिए मैं अपनी स्त्री और बच्चों को वहीं छोड़कर श्री रघुनाथजी की शरण में आया हूँ॥ 16॥
 
‘Not only this, he said many harsh things to me and insulted me like a slave. That is why I left my wife and children there and came to the shelter of Shri Raghunathji.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)