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ramayan 6.16.26: हे रात्रियों के राजा! मैं आपका हितैषी हूँ। इसीलिए मैंने आपको बार-बार कुमार्ग पर चलने से रोका है, किन्तु आपको मेरी बातें अच्छी नहीं लगतीं। वास्तव में, जिनकी आयु समाप्त हो जाती है, वे लोग जीवन के अंत में अपने मित्रों द्वारा दी गई हितकारी सलाह भी नहीं सुनते।॥26॥   |   ramayan सर्ग 6.16: रावण के द्वारा विभीषण का तिरस्कार और विभीषण का भी उसे फटकारकर चल देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 16: रावण के द्वारा विभीषण का तिरस्कार और विभीषण का भी उसे फटकारकर चल देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.16.26 
निवार्यमाणस्य मया हितैषिणा
न रोचते ते वचनं निशाचर।
परान्तकाले हि गतायुषो नरा
हितं न गृह्णन्ति सुहृद्भिरीरितम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे रात्रियों के राजा! मैं आपका हितैषी हूँ। इसीलिए मैंने आपको बार-बार कुमार्ग पर चलने से रोका है, किन्तु आपको मेरी बातें अच्छी नहीं लगतीं। वास्तव में, जिनकी आयु समाप्त हो जाती है, वे लोग जीवन के अंत में अपने मित्रों द्वारा दी गई हितकारी सलाह भी नहीं सुनते।॥26॥
 
‘O king of the nights! I am your well-wisher. That is why I have repeatedly stopped you from following the wrong path, but you do not like my words. In fact, those people whose life span ends, do not listen to the beneficial advice given by their friends at the end of their life.'॥ 26॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे षोडश: सर्ग: ॥ १ ६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें सोलहवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ ६॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)