Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.16.25: राक्षसराज! मैं आपका कल्याण चाहता हूँ। अतः यदि मेरी कही हुई बात आपको अच्छी न लगे, तो कृपया मुझे क्षमा करें; क्योंकि आप मेरे बड़े भाई हैं। अब आप अपनी तथा राक्षसों सहित समस्त लंकापुरी की हर प्रकार से रक्षा करें। आपका कल्याण हो। अब मैं यहाँ से चला जाऊँगा। आप मेरे बिना भी सुखी रहें॥ 25॥ | ramayan सर्ग 6.16: रावण के द्वारा विभीषण का तिरस्कार और विभीषण का भी उसे फटकारकर चल देना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राक्षसराज! मैं आपका कल्याण चाहता हूँ। अतः यदि मेरी कही हुई बात आपको अच्छी न लगे, तो कृपया मुझे क्षमा करें; क्योंकि आप मेरे बड़े भाई हैं। अब आप अपनी तथा राक्षसों सहित समस्त लंकापुरी की हर प्रकार से रक्षा करें। आपका कल्याण हो। अब मैं यहाँ से चला जाऊँगा। आप मेरे बिना भी सुखी रहें॥ 25॥
‘Raj of demons! I want your welfare. Therefore, if you do not like whatever I have said, please forgive me for that; because you are my elder brother. Now you protect yourself and the entire Lankapuri along with the demons in every possible way. May you be blessed. Now I will leave from here. You be happy without me.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥