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ramayan 6.16.21: राजा! ऐसे लोग तो आसानी से मिल जाते हैं जो सदैव मधुर और प्रिय वचन बोलते हैं; परन्तु ऐसे लोग दुर्लभ हैं जो सुनने में अप्रिय परन्तु फल देने वाले वचन बोलते और सुनते हैं।॥ 21॥   |   ramayan सर्ग 6.16: रावण के द्वारा विभीषण का तिरस्कार और विभीषण का भी उसे फटकारकर चल देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 16: रावण के द्वारा विभीषण का तिरस्कार और विभीषण का भी उसे फटकारकर चल देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.16.21 
सुलभा: पुरुषा राजन् सततं प्रियवादिन:।
अप्रियस्य च पथ्यस्य वक्ता श्रोता च दुर्लभ:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
राजा! ऐसे लोग तो आसानी से मिल जाते हैं जो सदैव मधुर और प्रिय वचन बोलते हैं; परन्तु ऐसे लोग दुर्लभ हैं जो सुनने में अप्रिय परन्तु फल देने वाले वचन बोलते और सुनते हैं।॥ 21॥
 
‘King! One can easily find people who always speak sweet words that are pleasing to one; but it is rare to find people who speak and listen to words that are unpleasant to hear but beneficial in result.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)