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ramayan 6.15.9: 'पिताजी! आप अभी बालक हैं। आपकी बुद्धि अभी अपरिपक्व है। आपका मन अभी तक उचित-अनुचित का निर्णय नहीं कर पाया है। इसीलिए आप ऐसी बकवास करने लगे हैं जो आपके ही विनाश का कारण बन रही है।॥9॥   |   ramayan सर्ग 6.15: इन्द्रजित द्वारा विभीषण का उपहास तथा विभीषण का उसे फटकारकर सभा में अपनी उचित सम्मति देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 15: इन्द्रजित द्वारा विभीषण का उपहास तथा विभीषण का उसे फटकारकर सभा में अपनी उचित सम्मति देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.15.9 
न तात मन्त्रे तव निश्चयोऽस्ति
बालस्त्वमद्याप्यविपक्वबुद्धि:।
तस्मात् त्वयाप्यात्मविनाशनाय
वचोऽर्थहीनं बहु विप्रलप्तम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'पिताजी! आप अभी बालक हैं। आपकी बुद्धि अभी अपरिपक्व है। आपका मन अभी तक उचित-अनुचित का निर्णय नहीं कर पाया है। इसीलिए आप ऐसी बकवास करने लगे हैं जो आपके ही विनाश का कारण बन रही है।॥9॥
 
‘Father! You are still a child. Your intellect is immature. Your mind has not yet decided what is right and what is wrong. That is why you have started talking nonsense that is causing your own destruction.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)