श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 15: इन्द्रजित द्वारा विभीषण का उपहास तथा विभीषण का उसे फटकारकर सभा में अपनी उचित सम्मति देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.15.4 
किं नाम तौ मानुषराजपुत्रा-
वस्माकमेकेन हि राक्षसेन।
सुप्राकृतेनापि निहन्तुमेतौ
शक्यौ कुतो भीषयसे स्म भीरो॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वे दो मानव राजकुमार क्या हैं? हमारा एक साधारण राक्षस भी उन्हें मार सकता है; फिर हे मेरे कायर चाचा! तुम हमें क्यों डरा रहे हो?॥4॥
 
‘What are those two human princes? Even a simple demon of ours can kill them; then my cowardly uncle! Why are you scaring us?॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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