| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 14: विभीषण का राम को अजेय बताकर उनके पास सीता को लौटा देने की सम्मति देना » श्लोक 16 |
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| | | | श्लोक 6.14.16  | देवान्तको वापि नरान्तको वा
तथातिकायोऽतिरथो महात्मा।
अकम्पनश्चाद्रिसमानसार:
स्थातुं न शक्ता युधि राघवस्य॥ १६॥ | | | | | | अनुवाद | | देवान्तक, नरान्तक, अतिकाय, महाकाय, अतिरथ और पर्वत के समान शक्तिशाली अकपन भी युद्धस्थल में श्री रघुनाथजी के सामने नहीं टिक सकते॥16॥ | | | | Devantaka, Narantaka, Atikaya, Mahakaya, Atiratha and even Akpan, powerful as a mountain, cannot stand in front of Shri Raghunathji in the battlefield. 16॥ | | ✨ ai-generated | | |
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