श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 13: महापार्श्व का रावण को उकसाना और रावण का शाप के कारण असमर्थ बताना तथा अपने पराक्रम के गीत गाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.13.7 
उपप्रदानं सान्त्वं वा भेदं वा कुशलै: कृतम्।
समतिक्रम्य दण्डेन सिद्धिमर्थेषु रोचये॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'मैं बुद्धिमान पुरुषों द्वारा प्रयुक्त अनुनय, दान और विवेक आदि उपायों को छोड़कर केवल दण्ड द्वारा ही काम निकालना अधिक श्रेयस्कर समझता हूँ।
 
‘I consider it better to get the job done by punishment only, leaving aside the methods of persuasion, charity and discrimination used by wise men. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)