श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 13: महापार्श्व का रावण को उकसाना और रावण का शाप के कारण असमर्थ बताना तथा अपने पराक्रम के गीत गाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.13.5 
लब्धकामस्य ते पश्चादागमिष्यति किं भयम्।
प्राप्तमप्राप्तकालं वा सर्वं प्रतिविधास्यसे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
‘जब तुम्हारी इच्छा पूरी हो जाएगी, तब तुम्हें कौन-सा भय होगा? वर्तमान अथवा भविष्य में यदि कोई भय उत्पन्न होगा, तो वह सब भय उचित रूप से टल जाएगा।॥5॥
 
‘When your desire is fulfilled, what fear will come upon you? If any fear arises in the present or the future, then all that fear will be averted appropriately.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)