श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 13: महापार्श्व का रावण को उकसाना और रावण का शाप के कारण असमर्थ बताना तथा अपने पराक्रम के गीत गाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.13.20 
तच्चास्य बलमादास्ये बलेन महता वृत:।
उदित: सविता काले नक्षत्राणां प्रभामिव॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जैसे प्रातःकाल उदय होने पर सूर्यदेव तारों की प्रभा को हर लेते हैं, वैसे ही मैं अपनी विशाल सेना से घिरा हुआ उस वानरों की सेना को भी अपने में समाहित कर लूँगा॥ 20॥
 
Just as the Sun God, rising in the morning, snatches away the radiance of the stars, similarly, surrounded by my huge army, I shall assimilate that army of monkeys.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)