श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 13: महापार्श्व का रावण को उकसाना और रावण का शाप के कारण असमर्थ बताना तथा अपने पराक्रम के गीत गाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.13.18 
न मत्तो निर्गतान् बाणान् द्विजिह्वान् पन्नगानिव।
राम: पश्यति संग्रामे तेन मामभिगच्छति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
राम ने युद्धस्थल में मेरे धनुष से छूटे हुए ऐसे भयंकर, दो जीभ वाले सर्पों के समान बाण कभी नहीं देखे। इसी कारण वे मुझ पर आ रहे हैं॥18॥
 
Rama has never seen in the battlefield such dreadful arrows, which are like two-tongued serpents, shot from my bow. That is why they are coming at me.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)