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ramayan 6.13.14: "आज से यदि तू किसी पराई स्त्री के साथ बलपूर्वक समागम करेगा तो तेरा सिर सौ टुकड़ों में टूट जाएगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।" ॥14॥   |   ramayan सर्ग 6.13: महापार्श्व का रावण को उकसाना और रावण का शाप के कारण असमर्थ बताना तथा अपने पराक्रम के गीत गाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 13: महापार्श्व का रावण को उकसाना और रावण का शाप के कारण असमर्थ बताना तथा अपने पराक्रम के गीत गाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.13.14 
अद्यप्रभृति यामन्यां बलान्नारीं गमिष्यसि।
तदा ते शतधा मूर्धा फलिष्यति न संशय:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
"आज से यदि तू किसी पराई स्त्री के साथ बलपूर्वक समागम करेगा तो तेरा सिर सौ टुकड़ों में टूट जाएगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।" ॥14॥
 
"From today onwards if you forcefully have sexual intercourse with any other woman then your head will be broken into a hundred pieces, there is no doubt about it." ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)