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ramayan 6.13.12: 'मैंने बलपूर्वक उसके वस्त्र उतारकर उसे सहसा भस्म कर दिया। इसके बाद वह ब्रह्माजी के महल में गई। उसकी दशा हाथी द्वारा कुचले हुए कमल के फूल के समान हो गई॥12॥   |   ramayan सर्ग 6.13: महापार्श्व का रावण को उकसाना और रावण का शाप के कारण असमर्थ बताना तथा अपने पराक्रम के गीत गाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 13: महापार्श्व का रावण को उकसाना और रावण का शाप के कारण असमर्थ बताना तथा अपने पराक्रम के गीत गाना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.13.12 
सा प्रसह्य मया भुक्ता कृता विवसना तत:।
स्वयम्भूभवनं प्राप्ता लोलिता नलिनी यथा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
'मैंने बलपूर्वक उसके वस्त्र उतारकर उसे सहसा भस्म कर दिया। इसके बाद वह ब्रह्माजी के महल में गई। उसकी दशा हाथी द्वारा कुचले हुए कमल के फूल के समान हो गई॥12॥
 
‘I forcefully took off her clothes and suddenly consumed her. After this she went to Brahmaji's palace. Her condition was like that of a lotus flower trampled by an elephant.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)