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श्लोक 6.13.12  |
सा प्रसह्य मया भुक्ता कृता विवसना तत:।
स्वयम्भूभवनं प्राप्ता लोलिता नलिनी यथा॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| 'मैंने बलपूर्वक उसके वस्त्र उतारकर उसे सहसा भस्म कर दिया। इसके बाद वह ब्रह्माजी के महल में गई। उसकी दशा हाथी द्वारा कुचले हुए कमल के फूल के समान हो गई॥12॥ |
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| ‘I forcefully took off her clothes and suddenly consumed her. After this she went to Brahmaji's palace. Her condition was like that of a lotus flower trampled by an elephant.॥ 12॥ |
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