Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 6.13.11: 'एक बार मैंने आकाश में ज्वाला के समान चमकती हुई पुंजिकस्थला नामक एक अप्सरा को पितामह ब्रह्माजी के महल की ओर जाते देखा। वह अप्सरा भय के मारे मुझसे छिपकर आगे बढ़ रही थी।   |   ramayan सर्ग 6.13: महापार्श्व का रावण को उकसाना और रावण का शाप के कारण असमर्थ बताना तथा अपने पराक्रम के गीत गाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 13: महापार्श्व का रावण को उकसाना और रावण का शाप के कारण असमर्थ बताना तथा अपने पराक्रम के गीत गाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.13.11 
पितामहस्य भवनं गच्छन्तीं पुञ्जिकस्थलाम्।
चञ्चूर्यमाणामद्राक्षमाकाशेऽग्निशिखामिव॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'एक बार मैंने आकाश में ज्वाला के समान चमकती हुई पुंजिकस्थला नामक एक अप्सरा को पितामह ब्रह्माजी के महल की ओर जाते देखा। वह अप्सरा भय के मारे मुझसे छिपकर आगे बढ़ रही थी।
 
‘Once I saw an Apsara named Punjikasthala shining like a flame in the sky, who was going towards the palace of Grandfather Brahmaji. That Apsara was moving ahead hiding from me out of fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)