उस अवसर पर भगवान् इन्द्र की प्रेरणा से वायुदेव ने मुक्ताहार राजा रामचन्द्रजी को सौ स्वर्णकमलों से बनी हुई तथा सब प्रकार के रत्नों से विभूषित एक चमकती हुई माला भेंट की ॥69-70 1/2॥
On that occasion, with the inspiration of Lord Indra, Vayudev presented a shining garland made of hundred golden lotuses and adorned with all types of gems to Muktahar King Ramchandraji. 69-70 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥