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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य
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श्लोक 41
श्लोक
6.128.41
द्युतिमानेतदाख्याय रामो वानरसंयुत:।
हृष्टपुष्टजनाकीर्णामयोध्यां प्रविवेश स:॥ ४१॥
अनुवाद
यह सब कहकर महाप्रतापी श्री राम ने वानरों के साथ अयोध्या नगरी में प्रवेश किया, जो सुयोग्य पुरुषों से भरी हुई थी।
Having said all this, the illustrious Sri Rama, accompanied by the monkeys, entered the city of Ayodhya, which was filled with able-bodied men.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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