श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.128.22 
सर्वाभरणजुष्टाश्च ययुस्ता: शुभकुण्डला:।
सुग्रीवपत्न्य: सीता च द्रष्टुं नगरमुत्सुका:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव की पत्नियाँ और सीता, सभी आभूषणों से सुसज्जित और सुंदर कुण्डलों से सुसज्जित, उत्सुकता से नगर देखने के लिए घोड़े पर सवार होकर चलीं।
 
Sugreeva's wives and Sita, decked with all the ornaments and adorned with beautiful earrings, went on horseback with curiosity to see the city.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)