श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.128.18 
ततो वानरपत्नीनां सर्वासामेव शोभनम्।
चकार यत्नात् कौसल्या प्रहृष्टा पुत्रवत्सला॥ १८॥
 
 
अनुवाद
पुत्रवत्सला कौशल्या ने बड़े हर्ष और उत्साह के साथ, बड़े प्रयत्न से, समस्त वानरपत्नियों को सुन्दरतापूर्वक सजाया ॥18॥
 
Putravatsala Kausalya, with great joy and enthusiasm, with great effort, beautifully adorned all the monkey wives. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)