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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 128: भरत का श्रीराम को राज्य लौटाना, श्रीराम की नगरयात्रा, राज्याभिषेक, वानरों की विदार्इ तथा ग्रन्थ का माहात्म्य
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श्लोक 119
श्लोक
6.128.119
रामायणमिदं कृत्स्नं शृण्वत: पठत: सदा।
प्रीयते सततं राम: स हि विष्णु: सनातन:॥ ११९॥
अनुवाद
जो इस सम्पूर्ण रामायण को प्रतिदिन सुनता और सुनाता है, उस पर सनातन विष्णुस्वरूप भगवान श्री राम सदैव प्रसन्न रहते हैं ॥119॥
Lord Shri Ram, in the form of eternal Vishnu, is always happy with the one who listens and recites this entire Ramayana daily. 119॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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