श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.127.9 
शोभयन्तु च वेश्मानि सूर्यस्योदयनं प्रति।
स्रग्दाममुक्तपुष्पैश्च सुवर्णै: पञ्चवर्णकै:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
कल सूर्योदय तक लोग नगर के सभी घरों को सुवर्णमयी मालाओं, घने फूलों की मोटी मालाओं, बिना जनेऊ वाले कमल पुष्प आदि तथा रंग-बिरंगे अलंकारों से सजाएँ॥9॥
 
Tomorrow, by sunrise, people should decorate all the houses in the city with golden garlands, thick garlands of densely packed flowers, lotus flowers without thread etc. and colorful ornaments. 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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