श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.127.8 
ततोऽभ्यवकिरन्त्वन्ये लाजै: पुष्पैश्च सर्वत:।
समुच्छ्रितपताकास्तु रथ्या: पुरवरोत्तमे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘तो फिर लोग मार्ग पर लावा और फूल बिखेरें। इस महान नगर की सड़कों पर चारों ओर ऊँचे-ऊँचे ध्वज फहराएँ।॥8॥
 
‘Then let others scatter lava and flowers all along the road. Let tall flags be hoisted on all sides of the streets of this great city.॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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