श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.127.7 
स्थानानि च निरस्यन्तां नन्दिग्रामादित: परम्।
सिञ्चन्तु पृथिवीं कृत्स्नां हिमशीतेन वारिणा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
‘अयोध्या से नंदिग्राम तक का मार्ग साफ़ करो, चारों ओर की सारी भूमि पर बर्फ़ जैसा ठंडा जल छिड़को।॥ 7॥
 
‘Clear the road from Ayodhya to Nandigram, sprinkle ice-cold water on all the surrounding land.॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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