श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  6.127.63 
विमानं पुष्पकं दिव्यं संगृहीतं तु रक्षसा।
अगमद् धनदं वेगाद् रामवाक्यप्रचोदितम्॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
वह दिव्य पुष्पक विमान, जिसे राक्षस रावण ने बलपूर्वक छीन लिया था, अब श्री रामचन्द्रजी की आज्ञा से प्रेरित होकर शीघ्र ही कुबेर की सेवा में चला गया। 63.
 
The divine Pushpaka Vimana which the demon Ravana had forcibly captured, now inspired by the command of Shri Ramachandraji, quickly went to serve Kubera. 63.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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