श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  6.127.62 
ततो रामाभ्यनुज्ञातं तद् विमानमनुत्तमम्।
उत्तरां दिशमुद्दिश्य जगाम धनदालयम्॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
राम की अनुमति पाकर वह उत्तम विमान उत्तर दिशा की ओर चला और कुबेर के यहाँ गया ॥62॥
 
After receiving Rama's permission that excellent aircraft headed towards the north and went to Kubera's place. ॥ 62॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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