श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  6.127.57 
अवेक्षतां भवान् कोशं कोष्ठागारं गृहं बलम्।
भवतस्तेजसा सर्वं कृतं दशगुणं मया॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
‘तुम राज्य का कोष, अन्न-भंडार, भवन और सेना देखो। तुम्हारे पराक्रम से ये सब वस्तुएं पहले से दस गुनी बढ़ गई हैं।’॥57॥
 
‘You should see the kingdom's treasury, granaries, houses and army. Due to your power, all these things have increased ten times more than before.'॥ 57॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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