श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  6.127.52 
स्वागतं ते महाबाहो कौसल्यानन्दवर्धन।
इति प्राञ्जलय: सर्वे नागरा राममब्रुवन्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
उस समय अयोध्या के सभी नागरिकों ने हाथ जोड़कर एक स्वर में श्री रामचन्द्रजी से कहा- 'हे माता कौशल्या का आनन्द बढ़ाने वाले महाबाहु श्री राम! आपका स्वागत है, स्वागत है।'
 
At that time, all the citizens of Ayodhya folded their hands and said to Shri Ramchandraji in unison - 'O mighty-armed Shri Ram, who increases the joy of mother Kausalya! You are welcome, welcome.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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