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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना
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श्लोक 40
श्लोक
6.127.40
आरोपितो विमानं तद् भरत: सत्यविक्रम:।
राममासाद्य मुदित: पुनरेवाभ्यवादयत्॥ ४०॥
अनुवाद
भगवान् श्री रामजी ने वीर भरतजी को विमान पर चढ़ा लिया और श्री रघुनाथजी के पास पहुँचकर हर्ष में भरकर पुनः उनके चरणों में प्रणाम किया॥40॥
Lord Shri Ram took the brave Bharatji on the plane and after reaching Shri Raghunathji, filled with joy, he again prostrated himself at his feet. 40॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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