vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना
»
श्लोक 39
श्लोक
6.127.39
ततो रामाभ्यनुज्ञातं तद् विमानमनुत्तमम्।
हंसयुक्तं महावेगं निपपात महीतलम्॥ ३९॥
अनुवाद
इतने में ही श्री रामचन्द्रजी की अनुमति पाकर वह महान् विमान बड़े वेग और हंस के साथ पृथ्वी पर उतरा।
Meanwhile, after receiving the permission of Shri Ramchandraji, that great aircraft with great speed and a swan descended on the earth.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas