श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.127.37 
मनसा ब्रह्मणा सृष्टे विमाने भरताग्रज:।
रराज पृथुदीर्घाक्षो वज्रपाणिरिवामर:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
विश्वकर्माजी ने मन से जो विमान बनाया था, उस पर बैठे हुए विशाल नेत्रों वाले भगवान श्री राम वज्रधारी देवराज इन्द्र के समान शोभा पा रहे थे॥37॥
 
Sitting on that plane created by Vishwakarma through his mind, Lord Shri Ram with huge eyes was looking as beautiful as the thunderbolt-wielding Devraj Indra. 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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