श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 127: अयोध्या में श्रीराम के स्वागत की तैयारी, भरत के साथ सबका श्रीराम की अगवानी के लिये नन्दिग्राम में पहुँचना, श्रीराम का आगमन, भरत आदि के साथ उनका मिलाप तथा पुष्पक विमान को कुबेर के पास भेजना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  6.127.36 
प्राञ्जलिर्भरतो भूत्वा प्रहृष्टो राघवोन्मुख:।
यथार्थेनार्घ्यपाद्याद्यैस्ततो राममपूजयत्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
भरत हाथ जोड़कर श्री रामचंद्र की ओर देखते हुए खड़े हो गए। उनका शरीर आनंद से पुलकित हो रहा था। उन्होंने दूर से ही जल-अर्पण आदि विधिपूर्वक श्री राम का पूजन किया।
 
Bharata stood with folded hands, looking towards Shri Ramchandra. His body was thrilled with joy. He worshipped Shri Ram from a distance with proper rituals like offering water and water.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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